India: जांच करना सप्लाई इंस्पेक्टर को पड़ा महंगा , कोटेदार खुद दिया तहरीर
महराजगंज तहसील क्षेत्र में राशन दुकान की जांच के दौरान मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और जबरन हस्ताक्षर कराने के आरोपों से मामला गरमा गया है। ग्राम निवासी सुंदरलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर संबंधित पूर्ति निरीक्षक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है।शिकायती पत्र में सुंदरलाल ने आरोप लगाया है कि 25 सितंबर 2026 को शाम करीब चार बजे पूर्ति निरीक्षक मुकेश कुमार पांडेय राशन दुकान की जांच करने पहुंचे थे। आरोप है कि जांच के दौरान दुकान से चावल, गेहूं और चीनी ले जाने के बाद उससे कथित रूप से 50 हजार रुपये की मांग की गई।पीड़ित का आरोप है कि रुपये देने में असमर्थता जताने पर उसके साथ अभद्रता और मारपीट की गई तथा कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उससे सादे कागज पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए। सुंदरलाल ने पूर्व में भी रुपये मांगने और परेशान किए जाने का आरोप लगाया है।
कार्रवाई के बीच शिकायत को लेकर दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण
मामले का दूसरा पहलू भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि राशन दुकान की जांच के दौरान पूर्ति विभाग को किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है और विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित होती है, तो उसके बाद संबंधित व्यक्ति की ओर से अधिकारी के खिलाफ मारपीट अथवा जातिसूचक गाली-गलौज जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने की परिस्थितियों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी होगी।हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि शिकायत केवल कार्रवाई से बचने या अधिकारी को किसी मुकदमे में फंसाने के उद्देश्य से की गई है। इसका निर्धारण शिकायत में लगाए गए आरोपों,जांच के दौरान मिले साक्ष्यों, मौजूद लोगों के बयान,दस्तावेजों तथा दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही हो सकेगा।वहीं, यदि जांच में राशन दुकान पर वास्तव में अनियमितता सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए मारपीट/जातिसूचक गाली के आरोप—दोनों को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखा जाना आवश्यक होगा। केवल एक कार्रवाई या एक शिकायत के आधार पर पूरे मामले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।अधिकारी का पक्ष सामने आना भी जरूरी पूरे मामले में संबंधित पूर्ति निरीक्षक का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। प्रशासनिक जांच में अधिकारी का बयान और जांच के दौरान तैयार किए गए अभिलेख भी महत्वपूर्ण होंगे।अब निगाह जिलाधिकारी स्तर से होने वाली जांच पर है। जांच में यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है, वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है और राशन दुकान में अनियमितता सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला वास्तव में उत्पीड़न का है या विभागीय कार्रवाई के बीच सामने आया है

