परसदेपुर रायबरेली : सूखी टंकियां, बंद RO प्लांट और गायब टोटियां! करोड़ों खर्च के बाद भी अधूरी दिख रही पेयजल व्यवस्था,पूर्व भाजपा प्रत्याशी ने उठाए सवाल
केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन तथा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजनाओं पर नगर पंचायत परसदेपुर के वार्ड नंबर-2 की जमीनी हकीकत गंभीर सवाल खड़े कर रही है। करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित जलापूर्ति सुविधाएं और आरओ प्लांट होने के बावजूद स्थानीय लोगों को नियमित पेयजल नहीं मिल पा रहा है।वार्ड नंबर-2 महावीरन नगर, जो नगर पंचायत अध्यक्ष का निवास क्षेत्र भी माना जाता है, वहां के निवासियों का आरोप है कि वर्षों से स्थापित पानी की टंकियां सूखी पड़ी हैं और कई स्थानों पर नलों की टोटियां तक गायब हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें आज तक इन टंकियों से नियमित जलापूर्ति का लाभ नहीं मिला।स्थानीय नागरिकों के अनुसार टंटापुर के पास ऑन रोड लगा स्टैंड पोस्ट गंगा प्रसाद उर्फ कोलई के घर के निकट तथा बैजनाथ सरोज के घर के पास और चौकी परसदेपुर स्थापित टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर नलों की टोटियां तक नहीं हैं और टंकियां केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।जबकि टंटा पुर के पास टंकी भी गायब है।बताया जाता है कि नगर पंचायत क्षेत्र में लगभग 9 आरओ प्लांट स्थापित किए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार एक आरओ प्लांट की लागत करीब 11 लाख रुपये है। इसके अलावा 24 टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट लगाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की अनुमानित लागत करीब 50 हजार रुपये बताई जाती है। इस प्रकार आरओ प्लांट और स्टैंड पोस्ट पर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।इसके बावजूद यदि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाए? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु नहीं हो सकी, तो योजनाओं के संचालन, रखरखाव और निगरानी पर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है। सबसे अहम बात यह है कि इसी वार्ड से भाजपा नगर अध्यक्ष और भाजपा निर्वाचित सभासद के साथ-साथ शासन द्वारा नामित दो सभासद भी आते हैं। इसके बावजूद पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव लोगों में नाराजगी का कारण बना हुआ है।भीषण गर्मी के इस दौर में जहां इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक पानी के लिए परेशान हैं, वहीं सूखी टंकियां, बंद पड़े आरओ प्लांट और निष्क्रिय स्टैंड पोस्ट सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर को उजागर करते नजर आ रहे हैं।अब स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि जब टंकियां ही पानी को तरस रही हैं, आरओ प्लांट अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रहे हैं और करोड़ों रुपये की व्यवस्थाएं निष्क्रिय पड़ी हैं, तो आम जनता की प्यास आखिर कौन बुझाएगा? पूर्व भाजपा प्रत्याशी गंगा प्रसाद उर्फ कोलई द्वारा बताया गया कि जब एक बूंद पानी टंकी को नसीब नहीं हुआ तो हम क्या उम्मीद करे। अब उम्मीद जगी है कि शायद संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर जल्द प्रभावी कार्रवाई करेंगे और पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाएंगे।इस बाबत अधिशाषी अधिकारी निमिषा भारद्वाज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसकी सूचना नहीं है अगर ऐसा है तो उसे ठीक कराया जाएगा।

