डीह रायबरेली : दलालों के नाम भी उजागर
रायबरेली के डीह थाना क्षेत्र में दो नाबालिग बहनों की शादी विदाई से ठीक पहले पुलिस ने रुकवा दी। लेकिन बाल विवाह रोकने की कार्रवाई के बाद अब मामला नया मोड़ ले चुका है। लड़की की मां ने पुलिस पर दूल्हा पक्ष से डेढ़ लाख रुपये लेकर छोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश से रिश्ता कराने वाले कथित दलालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।डीह थाना क्षेत्र के पूरे दुबे मजरे लोधवारी गांव में बुधवार रात हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से दो बारातें आई थीं। रातभर वैवाहिक रस्में, भोज और अन्य कार्यक्रम संपन्न हुए। विदाई की तैयारी चल रही थी, तभी 1090 पर सूचना मिली कि दोनों लड़कियां नाबालिग हैं। सूचना मिलते ही डीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शादियां रुकवा दीं। पुलिस दोनों दूल्हों और बारातियों को थाने ले आई तथा मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी) को भी दी गई।पुलिस की कार्रवाई के बाद शादी में दिए गए जेवरात दूल्हा पक्ष को वापस कराए गए और दोनों लड़कियों को उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया।लड़की की मां ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। छह बेटियों के पालन-पोषण का बोझ होने और पति के कोई काम न करने के कारण उसने बेटियों की शादी करने का फैसला लिया था। उसका कहना है कि अभी केवल शादी करानी थी, जबकि गौना बालिग होने के बाद कराया जाता। मां का यह भी कहना है कि उसकी बड़ी बेटी की शादी पहले से हिमाचल प्रदेश में हुई है और उसी के माध्यम से कथित बिचौलियों ने दोनों रिश्ते तय कराए थे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि नाबालिग लड़कियों के रिश्ते तय कराने वाले कथित दलालों पर क्या कार्रवाई होगी। मामले में नया मोड़ तब आया जब लड़की की मां ने आरोप लगाया कि डीह थाना पुलिस ने दूल्हे के साथ मारपीट की और दूल्हा पक्ष से करीब डेढ़ लाख रुपये लेकर उन्हें छोड़ा। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी इस संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया गया है।यह पीड़ित पक्ष के बयान पर आधारित खबर है।इस खबर की पुष्टी टीवी भारत नहीं करता।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यदि जांच में बाल विवाह की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं,पुलिस पर लगे वसूली के आरोप और कथित दलालों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है।

